गलती मेरी नहीं है दोष किसी और का है

गलती

गलती मेरी नहीं है दोष किसी और का है

इस दिनिया में सबसे ज्यादा जूठ, थोक बंध जूठ, होलसेल के भाव में जूठ कौन बोलता है ? कोई बता सकता है ?

व्यापारी ?

वकील ?

पॉलिटिशियन ?

अरे भाई ये तो बदनाम है ही लेकिन मैं अगर एक और नाम बताऊंगा तो आप सब चौंक उठोगे सचमुच और यह है हर एक हिन्दुस्तानी और यह जूठ जो हम सब हजारो लाखों बार बोलते है वह है…

गलती मेरी नहीं है।

एक सर्वेक्षण किया गया था जेल के अंदर जिसमे आम कैदी से डबल मर्डर करने वाले खूंखार कैदी को पूछा गया की तुमने ऐसा घिनौना काम क्यों किया तो हर किसीने अपनी सफाई देते हुए सिर्फ एक जी बात कही इसमें गलती मेरी नहीं है… दोष किसी और का है।

अरे कैदी को छोडो आप किसी भी कचहरीमें चले जाओ, ऑफिसमें चले जाओ, घर घर चले जाओ हर कोई कहेगा गलती मेरी नहीं है… दोष किसी और का है।

और इसी आरग्युमेन्ट में कितने घर बर्बाद हो गए, एम्पायर बरबाद हो गये और होते रहेंगे क्योंकि यहाँ तो हर कोई कह रहा है गलती मेरी नहीं है… दोष किसी औरका है।

दूसरों की गलती बतानेकी यह ट्रेनिंग बचपन से मिलाती है 

एक बेटा अपने दादाजी से पूछता है।  दद्दू आपने इतनी बड़ी हवेली क्यों नहीं बनाई ? तो दद्दू कहते है बेटा कराची में इससे भी बड़ी हवेली थी लेकिन सब लूट गए बरबाद हो गये और यहाँ आना पड़ा क्या करें ?

अरे भाई क्या तुम अकेले ही ऐसे थे ? तो सब क्या आज तुम्हारी तरह ही बेहाल है ?

अरे वह अपने आप के अलावा सारी दुनिया की गलतियाँ बताएगा।  मेरे साथ ये नहीं था… वो नहीं था… फलाना नहीं था… दुनिया भर की बातें करेगा और बताएगा की इस दुनिया का सबसे बढ़ा विक्टिम आदमी वही है।

इस समाज का, इस सिस्टम का, इस एडमिनिस्ट्रेशन का इस पक्षपात भरी रीति निति का Gender Bias का विक्टिम में हूँ। अगर अन्याय, अत्याचार, उत्पीड़न हो रहा है तो सिर्फ मेरा हो रहा है। जो हुआ है, जो हो रहा है, जो मेरे साथ हुआ है…. जो आज में हूँ जिस जगह पर हूँ, जिस हालात पर हूँ उसके लिए जिम्मेदार मैं नहीं हूँ।  गलती किसी और की है। दोष किसी औरका है।

यह सारे लोग किसिनी किसी तरह की मानसिकता से पीड़ित है। कईओ को कुंठाए हो सकती है, कईओ को इर्षा, अभिमान, तनाव, किसीसे पीछे रह जानेका तनाव तो कईओ को सौम्य मनोविकृति भी हो सकती है। मैं ये नहीं मानता हूँ की प्रकृति प्राण के साथ ही जाती है। आपके विचार  Distorted Thinking, आपके पूर्वग्रह, और इस जहां के देखने के आपके चश्मे के ग्लास बदले भी जा सकते है। हाँ, यह संभव है। आधुनिक मनोचिकित्सा विज्ञान ने यह संभव बनाया है बस आपको एक काम करना है।

अगर आपके किसीसे संबंध अच्छे नहीं है अगर आप अपनी Physical उम्र के हिसाब से Grow नहीं कर पा रहे है

अगर आप यह महसूस कर रहे है की आप Victim है… आपको कोई समझ नहीं रहा है तो यह मत कहिये की दोष किसी और का है इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। हाँ इसमें जिम्मेदारी आपकी है अपनी गलतियों का Remote Control अपने हाथमे लीजिए और अपना काल,अपने परिवार, अपने समाज, अपने देश के सुनहरे काल का निर्माण कीजिये जिम्मेदारी आपकी है।

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